Search The Query
  • Home
  • col indai
  • खदान विस्तार की आहट से डोला राम मंदिर क्षेत्र में हलचल, विस्थापन की तैयारी; दो माह में मुआवजा देने के निर्देश

खदान विस्तार की आहट से डोला राम मंदिर क्षेत्र में हलचल, विस्थापन की तैयारी; दो माह में मुआवजा देने के निर्देश

अनूपपुर/बिजुरी।
जमुना-कोतमा और हसदेव क्षेत्र में कोयला खदानों के लगातार बढ़ते विस्तार के बीच अब डोला राम मंदिर के आसपास बसे परिवारों पर विस्थापन की स्थिति बनती नजर आ रही है। खदान परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास, मुआवजा और मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे को लेकर बिजुरी नगर पालिका सभागार में प्रशासन, खदान प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कोतमा विधायक एवं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने की।
बैठक में खदान विस्तार से प्रभावित इलाकों की स्थिति, पुनर्वास की प्रक्रिया, मुआवजा वितरण, रोजगार के अवसर और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से डोला राम मंदिर के आसपास निवासरत परिवारों के विस्थापन का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। मंत्री दिलीप जायसवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को दो माह के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और नियमानुसार पुनर्वास की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।
मंत्री जायसवाल ने कहा कि खदानों के विस्तार से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है, लेकिन इसके साथ-साथ उन परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है जो परियोजना से प्रभावित होते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित परिवारों के साथ संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्य किया जाए तथा मुआवजा और पुनर्वास से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुसार पूरा किया जाए।
बैठक में यह भी बताया गया कि किसी भी परियोजना के कारण लोगों को विस्थापित करने से पहले भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होता है। इस कानून के अंतर्गत प्रभावित परिवारों को बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा, पुनर्वास की व्यवस्था तथा कई मामलों में रोजगार या आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।
मंत्री ने खदान प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, शुद्ध पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य आवश्यक मूलभूत व्यवस्थाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा माना जाएगा जब क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर हो।


बैठक के दौरान प्रशासन और कोयला खदान प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों से कहा गया कि वे प्रभावित परिवारों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उनका समाधान पारदर्शी तरीके से करें। साथ ही खदान विस्तार से जुड़े सभी कार्यों में स्थानीय लोगों के हितों का विशेष ध्यान रखने की भी बात कही गई।
इस अवसर पर बैठक में एसडीएम कोतमा टी.आर. नाग, नायब तहसीलदार धनीराम सिंह, सीएमओ पवन साहू, इंजीनियर देवल सिंह, हसदेव क्षेत्र के महाप्रबंधक मनोज विश्नोई, जमुना-कोतमा क्षेत्र के महाप्रबंधक, विभिन्न खदानों के सब-एरिया मैनेजर तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि खदान विस्तार के साथ आने वाले समय में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजा प्रक्रिया किस प्रकार लागू होगी। स्थानीय लोग अब प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। कई परिवारों का कहना है कि यदि पुनर्वास और मुआवजा की प्रक्रिया पारदर्शी और समय पर पूरी होती है तो इससे उन्हें नई जगह पर बसने में राहत मिलेगी, वहीं कुछ लोग अब भी अपने भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

Releated Posts

शहडोल का गौरव : बी. साईंराम बने कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन

शहडोल का गौरव : बी. साईंराम बने कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन शहडोल। जनकलम न्यूज़ संपादक विकास कुमार…

ByBysaraswatinews.com Sep 23, 2025

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top