मौहरी पंचायत में मनरेगा कार्यों पर सवाल, ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
अनूपपुर/जैतहरी।
जनपद पंचायत जैतहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत मौहरी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पंचायत के श्रमिकों एवं ग्रामीणों ने रोजगार सहायक एवं संबंधित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, फर्जी मूल्यांकन और योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मजदूरों ने लगाए शोषण के आरोप
लघु तालाब निर्माण सहित अन्य मनरेगा कार्यों में लगे मजदूरों का आरोप है कि कार्य का मूल्यांकन मनमाने ढंग से कम कर उनकी मजदूरी में कटौती की जा रही है। कुछ श्रमिकों ने अभद्र व्यवहार एवं जातिसूचक टिप्पणी किए जाने की भी शिकायत की है।
मजदूरों के अनुसार, जब उन्होंने इस संबंध में रोजगार सहायक से चर्चा की तो उन्होंने जिम्मेदारी संबंधित इंजीनियर पर डाल दी, जबकि इंजीनियर का कहना है कि मूल्यांकन रोजगार सहायक द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों से भौतिक निरीक्षण के बिना ही रिपोर्ट तैयार कर भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
प्रधानमंत्री आवास व वृक्षारोपण योजना में भी अनियमितता के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में कुछ प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण अधूरा है, बावजूद इसके भुगतान निकाले जाने की बात सामने आई है। जियो-टैगिंग के नाम पर कथित रूप से फर्जी फोटो अपलोड कर राशि आहरित करने का भी आरोप लगाया गया है।
इसी प्रकार ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना के तहत वृक्षारोपण कार्य में भी धरातल पर पौधारोपण न होने के बावजूद डिमांड लगाकर मजदूरी एवं सामग्री की राशि निकालने की शिकायत की गई है।
फर्जी हाजिरी और मिलीभगत की आशंका
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ कार्यों में फर्जी हाजिरी दर्ज कर भुगतान निकाला गया। बाउंड्री वॉल, निर्मल नीर कुआं, सीसी रोड एवं खेत तालाब निर्माण कार्यों में भी अनियमितताओं की बात कही जा रही है। पंचायत स्तर पर संबंधित कर्मचारियों के बीच कथित मिलीभगत से शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
निष्पक्ष जांच की मांग
लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि पंचायत में पूर्व एवं वर्तमान में संचालित सभी कार्यों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बनी रहे और श्रमिकों को न्याय मिल सके।






