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नगर परिषद डूमरकछार : बदलती तस्वीर, बढ़ता विश्वासअनूपपुर/राजनगर कॉलरी।

नगर परिषद डूमरकछार : बदलती तस्वीर, बढ़ता विश्वास
अनूपपुर/राजनगर कॉलरी।
सीमांत जिले अनूपपुर में स्थित नगर परिषद डूमरकछार आज केवल एक निकाय नहीं, बल्कि जनसेवा की जीवंत प्रयोगशाला बन चुका है। यहाँ विकास फाइलों में नहीं, गलियों में दिखाई देता है; योजनाएँ घोषणाओं में नहीं, घर-घर तक पहुँचती हैं।
नेतृत्व जो सुनता भी है, करता भी है
निकाय अध्यक्ष एवं जिला योजना समिति सदस्य डॉ. सुनील कुमार चौरसिया के नेतृत्व में प्रशासन ने यह सिद्ध कर दिया है कि इच्छाशक्ति और ईमानदार पहल से सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव संभव हैं।


हेल्प डेस्क: “एक दरवाज़ा, हर समाधान


अब नागरिकों को विभाग-दर-विभाग भटकना नहीं पड़ता। हेल्प डेस्क पर समस्या दर्ज होते ही संबंधित शाखा से समन्वय कर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाता है। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास — तीनों मजबूत हुए हैं।
डिजिटल संवाद: सीधे जनता के मोबाइल तक
तीन वर्षों से एसएमएस सेवा के माध्यम से योजनाओं की सूचना सीधे नागरिकों तक पहुँच रही है।
हर वार्ड का अलग व्हाट्सएप समूह बनाकर पार्षद, कर्मचारी और अध्यक्ष को जोड़ा गया है, जहाँ केवल समस्या और समाधान पर चर्चा होती है। “गुड मॉर्निंग” नहीं, “गुड गवर्नेंस” यहाँ की पहचान है।
“आपका विकास, आपके साथ” : जब सरकार आई दरवाज़े पर
जनचौपाल की पहल ने प्रशासन को जनता के बीच ला खड़ा किया। दरी पर बैठकर समस्याएँ सुनना और सूचीबद्ध कर समाधान की कार्यवाही करना—यह दृश्य आज भी लोगों के विश्वास को नया आधार दे रहा है। सैकड़ों स्थानीय मुद्दों का निराकरण इसी पहल से संभव हुआ है।
सुझाव पेटी: जनता की आवाज़ का सम्मान


तीन वर्षों से स्थापित सुझाव पेटी इस बात का प्रमाण है कि निकाय केवल सुनता ही नहीं, बल्कि सुझावों को नीति का हिस्सा भी बनाता है।
वार्ड दर्शन: मॉर्निंग वॉक से मिशन तक
18–19 फरवरी 2026 को प्रातः भ्रमण के दौरान दो बुजुर्गों ने बताया कि उनका आयुष्मान कार्ड नहीं बना है।
मॉर्निंग वॉक समाप्त होते ही स्टाफ उनके घर पहुँचा और मात्र 3–4 घंटे में 70 वर्ष से अधिक आयु के दोनों वरिष्ठ नागरिकों का आयुष्मान कार्ड बनाकर उन्हें सौंप दिया गया।
यह घटना केवल एक कार्ड बनने की नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन की पहचान है — जहाँ समस्या सुनते ही समाधान शुरू हो जाता है।
डूमरकछार: अब एक मॉडल
नगर परिषद डूमरकछार आज यह संदेश दे रहा है कि स्थानीय निकाय यदि जनभागीदारी और नवाचार को साथ लेकर चलें, तो सीमित संसाधनों में भी असाधारण परिणाम संभव हैं।
यहाँ विकास घोषणा नहीं, अनुभव है।
यहाँ प्रशासन दूरी नहीं, निकटता है।
यहाँ नारा नहीं, विश्वास काम करता है।
डूमरकछार की यह पहल आने वाले समय में अन्य निकायों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

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