जिला अस्पताल में बड़ा फर्जीवाड़ा: हड्डी रोग विशेषज्ञ बन मरीज देखता रहा युवक, जांच शुरू
अनूपपुर। जिला चिकित्सालय अनूपपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां हड्डी रोग विशेषज्ञ की कुर्सी पर बैठकर एक युवक खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज करता रहा। मामला तब उजागर हुआ जब पत्रकारों की टीम अस्पताल पहुंची और पूछताछ शुरू की। कैमरा और सवाल देख कथित फर्जी डॉक्टर मौके से फरार हो गया।
लंबे समय से चल रहा था खेल
सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल के कक्ष क्रमांक 5 में कई दिनों से यह व्यक्ति मरीजों को देख रहा था। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज उसे असली डॉक्टर समझकर अपनी समस्याएं बता रहे थे और इलाज भी करवा रहे थे। बताया जा रहा है कि वह कभी खुद को मेडिकल ऑफिसर तो कभी हड्डी रोग विशेषज्ञ बताकर मरीजों से संपर्क करता था।
यह भी चर्चा है कि वह व्यक्ति अस्पताल में लंबे समय से आता-जाता रहा और धीरे-धीरे डॉक्टर की तरह बैठने लगा। इससे अस्पताल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है।
पत्रकारों के पहुंचते ही मचा हड़कंप
जब पत्रकारों ने मौके पर पहुंचकर वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की और पहचान संबंधी सवाल पूछे, तो कथित डॉक्टर के जवाब उलझने लगे। कुछ ही देर में वह कुर्सी छोड़कर वहां से निकल गया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और जिम्मेदार अधिकारी भी तुरंत स्थिति संभालने पहुंचे।
अधिकारियों के बयान
अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले को गंभीर बताया है।
सिविल सर्जन ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना वैध नियुक्ति के मरीज देखने की अनुमति नहीं है और मामले की जांच कराई जाएगी।
हड्डी रोग विशेषज्ञ ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा किसी को भी इलाज के लिए अधिकृत नहीं किया गया था।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि यदि कोई फर्जी तरीके से मरीज देख रहा था तो यह गंभीर लापरवाही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
कलेक्टर ने भी मामले में जांच के निर्देश दिए हैं।
जनता की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना नियुक्ति और पहचान के कोई व्यक्ति अस्पताल में डॉक्टर बनकर कैसे बैठ गया और मरीजों का इलाज करता रहा। इससे मरीजों की जान को भी खतरा हो सकता था।
कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में ही इस तरह की लापरवाही होगी तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा।
फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।





