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e-KYC से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार, 93 प्रतिशत हितग्राहियों का सत्यापन पूर्णमध्यप्रदेश सरकार को मिली बड़ी सफलता, हर माह ₹32.43 करोड़ की बचत

e-KYC से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार, 93 प्रतिशत हितग्राहियों का सत्यापन पूर्ण
मध्यप्रदेश सरकार को मिली बड़ी सफलता, हर माह ₹32.43 करोड़ की बचत

जनकलम संपादक विकास कुमार की रिपोर्ट

भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी, न्यायपूर्ण और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य में e-KYC (इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी) प्रक्रिया के सफल क्रियान्वयन से फर्जी और अपात्र नामों को हटाकर व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अनुसार प्रदेश में कुल पंजीकृत 536.23 लाख हितग्राहियों में से 497.08 लाख हितग्राहियों का e-KYC पूर्ण हो चुका है, जो कुल का लगभग 93 प्रतिशत है।

e-KYC प्रक्रिया पूरी होने के बाद 34.87 लाख अपात्र हितग्राहियों के नाम पोर्टल से हटाए गए हैं। इससे न केवल पात्र लोगों तक ही सरकारी सहायता सीमित हुई है, बल्कि शासन को हर माह लगभग ₹32.43 करोड़ की बचत भी हो रही है। इस बचत राशि से अनुमानित 14 लाख नए पात्र हितग्राहियों को पात्रता पर्ची जारी कर उन्हें निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।

72 घंटे में पात्रता पर्ची की सुविधा

राज्य सरकार ने e-KYC प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया है। अब पात्रता पर्ची जारी करने की प्रक्रिया को 72 घंटे के भीतर पूरा किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।

“मेरा e-KYC ऐप” से फेस ऑथेंटिकेशन

प्रदेश में पहली बार हितग्राहियों के लिए “मेरा e-KYC ऐप” के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन आधारित e-KYC सुविधा शुरू की गई है। यह व्यवस्था बायोमेट्रिक सत्यापन के साथ पूरी तरह सुरक्षित और आसान है, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिली है।

पारदर्शिता और न्याय की ओर मजबूत कदम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि गरीबों के हक का एक-एक दाना सही व्यक्ति तक पहुँचना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। e-KYC के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ी है, फर्जीवाड़े पर रोक लगी है और वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि e-KYC की यह सफलता आने वाले समय में अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए भी एक प्रभावी मॉडल साबित होगी।

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