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भ्रष्टाचार का नया खेल बिना वर्क ऑर्डर शुरू हुआ निर्माण,

भ्रष्टाचार का नया खेल बिना वर्क ऑर्डर शुरू हुआ निर्माण, SECL की दखल के बाद नगर परिषद बनगवा-राजनगर में हड़कंप

नियमों की अर्थी पर विकास का जश्न…! अध्यक्ष, CMO और इंजीनियर ने नगर परिषद को बनाया भ्रष्टाचार का प्राइवेट लिमिटेड

नगर परिषद में इस समय ‘बिना दूल्हे की बारात’ जैसा हाल है। सीएमओ और इंजीनियर की नाक के नीचे बिना किसी वैधानिक आदेश के काम हो रहे हैं और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष इसे ‘आने वाले आदेश’ का हवाला देकर जायज ठहरा रहे हैं। यह घोर प्रशासनिक लापरवाही है या फिर सोची-समझी साजिश? एसईसीएल की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि परिषद के मुखिया और अधिकारियों की मिलीभगत से राजनगर में सरकारी राशि का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है।

राजनगर। भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के लिए सुर्खियों में रहने वाली नगर परिषद बनगवा-राजनगर एक बार फिर कटघरे में है। ताजा मामले ने परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ नियम-कानून को ताक पर रखकर बिना किसी आधिकारिक कार्य आदेश (Work Order) के ही वार्ड क्रमांक 9 में निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। जैसे ही मामले की भनक SECL प्रबंधन को लगी, सुरक्षा प्रहरियों ने मौके पर पहुंचकर काम रुकवा दिया।

50 पुरानी ईंटों की जगह 500 का खेल..?

वार्ड क्रमांक 9 में SECL द्वारा निर्मित सड़क के बीचों-बीच सौंदर्यीकरण के नाम पर बनी बाउंड्री वॉल को गुपचुप तरीके से तोड़ा जा रहा था। चर्चा है कि महज 10-50 पुरानी ईंटों को हटाकर वहां 400-500 नई ईंटें लगाने की तैयारी थी। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब कार्य आदेश ही जारी नहीं हुआ तो निर्माण की सामग्री और मजदूर कहाँ से आए? आशंका यह जताई जा रही है कि स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सरकारी खजाने में सेंध लगाने का एक पुराना तरीका है, जिसमें काम पहले और कागजी खानापूर्ति बाद में की जाती है।

साहब’ बाहर हैंआने पर बन जाएगा वर्क ऑर्डर

जब इस मनमानी पर जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगा गया तो उनका तर्क हैरान करने वाला था। सफाई दी गई कि अधिकारी अभी बाहर हैं उनके आने के बाद कार्य आदेश जारी कर दिया जाएगा। यह बयान अपने आप में परिषद की व्यवस्था की पोल खोलता है। क्या नगर परिषद में काम नियमों से नहीं बल्कि रसूखदारों की मर्जी से चलता है? बिना टेंडर या आदेश के किसी सरकारी संपत्ति पर निर्माण शुरू करना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।

फाइलों में दफन घोटाले- प्रमुखता से जांच की मांग

यह कोई पहली बार नहीं है जब बनगवा-राजनगर परिषद विवादों में है। पिछले पांच वर्षों का इतिहास खंगाला जाए तो फर्जी संविलियन भर्ती घोटाला अभी भी लोगों की जुबान पर है। बिना काम के लाखों-करोड़ों रुपये के फर्जी बिल भुनाने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कार्यालय के भीतर और बाहर ऐसी कई अदृश्य फाइलें चल रही हैं, जिनका मकसद सिर्फ बजट ठिकाने लगाना है।
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस बार सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी पुरानी फाइलों की तरह धूल चाटता रह जाएगा?

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