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“मलगा पंचायत में मासूमों से मजदूरी! सीसी रोड निर्माण का वीडियो वायरल, प्रशासन पर उठे सवाल”

मलगा ग्राम पंचायत में नियमों की सरेआम धज्जियां! सीसी रोड निर्माण में नाबालिगों से मजदूरी का आरोप, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कं
अनूपपुर। जिले की ग्राम पंचायत मलगा में चल रहे सीसी रोड निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों द्वारा उपलब्ध कराए गए एक वीडियो में कथित रूप से नाबालिग बच्चों को निर्माण कार्य में मजदूरी करते हुए देखा जा सकता है। यदि वीडियो की पुष्टि होती है, तो यह मामला न केवल बाल श्रम कानूनों के उल्लंघन का है, बल्कि निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर नियमों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में उनके चहेते ठेकेदारों द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जहां बाल श्रम जैसे गंभीर अपराध की भी अनदेखी की जा रही है।


स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक ओर सरकार बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और बाल श्रम समाप्त करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायत स्तर पर निर्माण कार्यों में मासूम बच्चों से मजदूरी कराई जाना बेहद चिंताजनक है। इससे बच्चों का भविष्य और उनके अधिकार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए तो सामग्री की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया में भी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
क्या पंचायत निर्माण कार्यों में बाल श्रम कानून लागू नहीं होता?
यदि वीडियो सही है, तो नाबालिग बच्चों से मजदूरी किसके निर्देश पर कराई जा रही थी?
निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं?
क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा मौके पर निरीक्षण किया गया था?
प्रशासन से मांग
ग्रामीणों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर अनूपपुर, जिला पंचायत, श्रम विभाग तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में बाल श्रम और अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदार, जिम्मेदार अधिकारियों तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।

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