🔥 बिजुरी | विशेष रिपोर्ट
बिजुरी की बहुचर्चित किशोरी हत्याकांड की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि शनिवार सुबह एक और सनसनीखेज खबर ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया। जिस 17 वर्षीय नाबालिग को इस हत्याकांड का सबसे अहम चश्मदीद गवाह बताया जा रहा था, उसी ने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी।
बिजुरी-बोरीडांड रेलखंड पर पड़ा किशोर का शव सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनका जवाब अब पूरा समाज मांग रहा है।
जिस केस में पुलिस अपनी “6 घंटे में खुलासे” की पीठ थपथपा रही थी, उसी केस का मुख्य गवाह अचानक मौत को गले लगा लेता है… आखिर क्यों?

❓क्या गवाह मानसिक दबाव में था?
❓क्या उसे डराया-धमकाया जा रहा था?
❓क्या किसी बड़े नाम को बचाने के लिए एक मासूम की जिंदगी खत्म हो गई?
❓अगर खतरा था तो गवाह को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई?

ये सवाल अब सिर्फ परिवार नहीं, बल्कि पूरा बिजुरी पूछ रहा है।
मृतक माइन्स कॉलोनी का रहने वाला था। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद से किशोर बेहद डरा-सहमा रहता था। वहीं पुलिस अब इसे आत्महत्या बताकर हर पहलू की जांच की बात कह रही है, लेकिन लोगों के मन में उठ रहे शक शांत होने का नाम नहीं ले रहे।
घटना की गंभीरता को देखते हुए शहडोल आईजी, अनूपपुर एसपी, कोतमा एसडीओपी और बिजुरी थाना प्रभारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, लेकिन परिवार के आंसुओं के साथ इलाके में गुस्सा भी साफ दिखाई दिया।
⚠️ सबसे बड़ा सवाल — अगर एक मुख्य गवाह ही सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम जनता न्याय व्यवस्था पर भरोसा कैसे करे?
अब जनता मांग कर रही है कि — ➡️ पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो
➡️ गवाह की मौत की SIT या CBI जांच कराई जाए
➡️ यदि किसी प्रकार का दबाव या धमकी सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो
➡️ प्रदेश में गवाह सुरक्षा कानून को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखा जाए
बिजुरी में अब सिर्फ एक मौत की चर्चा नहीं है…
लोग कह रहे हैं —
“ बच्चा अगर जिंदा नहीं बच पाया, तो आखिर न्याय किसके भरोसे मिलेगा?”



