पाले से फसलों को बचाने के लिए किसानों को सामयिक सलाह
अनूपपुर 7 जनवरी 2026/ शीत लहर व अत्यधिक ठंड के दौरान रबी फसलों को पाले से बचाने के लिये कृषि विभाग द्वारा किसानों को सामयिक सलाह दी गई है। थोड़े से प्रयास से कृषकगण पाले से फसलों की सुरक्षा कर सकते हैं। फसलों को पाले से बचाव के लिये रात्रि में खेत की मेड़ों पर लगभग 6 से 8 स्थानो पर कचरा तथा खरपतवार आदि जलाकर धुंआ करना चाहिए।
यह प्रयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि धुआं सारे खेत में छा जाए तथा खेत के आसपास का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक आ जाए। इस प्रकार धुआं करने से फसल का पाले से बचाव किया जा सकता है। पाले की संभावना होने पर खेत की हल्की सिंचाई कर देना चाहिए। इससे मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है तथा नुकसान की मात्रा कम हो जाती है। सिंचाई बहुत ज्यादा न कर उतनी ही करनी चाहिए, जिससे खेत गीला हो जाए। रस्सी का उपयोग भी पाले से काफी सुरक्षा प्रदान करता है। इसके लिए दो व्यक्ति सुबह-सुबह (जितनी जल्दी हो सके) एक लंबी रस्सी को उसके दोनों सिरों से पकड़ कर खेत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक फसल को हिलाते चलना है। इससे फसल पर रात का जमा पानी गिर जाता है तथा फसल की पाले से सुरक्षा हो जाती है।
रबी फसल पर 8 से 10 कि.ग्रा. सल्फर डस्ट प्रति एकड का भुरकाव पाले से बचाव में लाभप्रद रहता है। इसके अलावा वेटेबल या घुलनशील सल्फर 200 ग्राम या ग्लूकोस पाउडर 500 ग्राम बनाकर अथवा प्रति थायो यूरिया 500 ग्राम या पोटेशियम सल्फेट (0ः0ः50) 200 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोल छिड़काव किया जा सकता है। साइकोसिल 400 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव भी कारगर रहता है।
शीतलहर का अत्यधिक असर दलहनी-तिलहनी, मटर व आलू की फसलों पर पड़ता है। शीतलहर के कारण पौधे की पत्तियां व फूल झुलसते, बाद में झड़ जाते हैं। रात के समय तापमान 4-5 डिग्री या इससे कम होता है तब धरातल के आसपास व फसलों-पौधों की पत्तियों पर बर्फ की पतली परत जम जाती है। इसी परत को पाला कहते हैं। पौधों की पत्तियों पर पाले का प्रकोप रात 12 से सुबह 4 बजे के बीच अधिकांश होता है। पाले से प्रभावित फसल व पौधों की पत्तियों पर पानी की बूंद जमा हो जाती है, पत्तियों की कोशिका भित्ती फट जाती है, जिससे पत्तियां सूखकर झड़ने लगती है।



